ग्राम कचहरी सचिव के मान्यदेय इतनी कम क्यों ? क्या कचहरी सचिव के साथ सरकार दोहरी निति अपना रही है ?

 ग्राम कचहरी सचिव की

 मान्यदेय अभी तक  इतनी कम क्यों है 

   ग्राम कचहरी सचिव की पूरी कहानी एक नजर में जाने 

जैसा की आप सभी जानते है बिहार में नितीश कुमार की एक महत्वकांक्षी सोच की न्याय के साथ विकास जो महात्मा गाँधी जी के सपनो को साकार करने चले थे जिसके लिए प्रत्येक पंचायत में एक ग्राम कचहरी का गठन किया गया | जिसमे एक ग्राम कचहरी सचिव एवं एक न्यायमित्र की संविदा पर वहाल किया गया | उस समय ग्राम कचहरी सचिव की मान्यदेय 2000 रुपये एवं न्यायमित्र का मान्यदेय 2500 रूपए था लेकिन कई सालो तक वितने के बाद भी कचहरी सचिव एवं न्यायमित्र की मान्यदेय में कोई वृद्धि नहीं हुई | एक तरह से देखा जाए  तो लगातार नीतीश कुमार अपनी अहंकारी निति राखी अहंकार में इतने चूर की उन्हें ये तक पता नहीं जो मान्यदेय दे रहे है उससे ग्राम कचहरी सचिव एवं न्यायमित्र को अपनी जरूरत की 10%  भी पूरा नहीं होगा | कई बार ग्राम कचहरी सचिव संघ के संगठन सरकार से बात की लेकिन सिर्फ आश्वासन के आलावा कुछ नहीं मिला हमेसा सरकार के तरफ से दोहरी निति अपनाई गई |
जब 2014 में लोक सभा चुनाव में JDU बुरी तरह हार गई तो नितीश कुमार पर ज्यादा प्रेसर हो गया | जिसके कारण वो मुख्यमंत्री पद से स्तीफा देकर उन्होंने जीतन राम मांझी जी मुख्यमंत्री बनाए  | जीतन राम मांझी जी ने ही जाते जाते - जाते लास्ट में 29 फैसला लिए थे | जिसमे एक फैसला ग्राम कचहरी सचिव एवं न्यायमित्र के लिए था | जिसमे कचहरी सचिव की मान्यदेय में वृद्धि करके 5000 रूपए कर दिया   बाद में जीतन राम मांझी जी का स्तीफा ले लिया गया और इनके बाद नितीश कुमार पुनः मुख्यमंत्री बने और जीतन राम मांझी मांझी जी द्वारा लिए लास्ट कैविनेट फैसले में से कुछ फैसले को नीतीश कुमार ने रद्द कर दिए लेकिन  नितीश कुमार शर्म से कहे या नितीश कुमार ये सोचें होंगे की अगर ये फैसला को भी रद्द करते तो हमें जनता में हमें माफ़ नहीं करेगा और जनता में गलत मेसेज जायेगा इसलिए नीतीश कुमार ने इस फैसले को संसोधन करके ग्राम कचहरी सचिव  का मान्यदेय 6000 रूपए एवं न्यायमित्र का मान्यदेय 7000 रूपए करके फैसले को पारित किये | अगर पुरे प्रक्रिया पर गौर करे तो ग्राम कचहरी सचिव एवं न्यायमित्र का मान्यदेय वृद्धि की सुरुआत जीतन राम मांझी जी ने किया | नीतीश कुमार ने हमेसा ग्राम कचहरी सचिव के साथ दोहरी निति अपनाते रहे क्योंकि अन्य संविदा कर्मी का मान्यदेय वृद्धि नितीश कुमार ने किये थे लेकिन ग्राम कचहरी सचिव का कोई भी वृद्धि नहीं किये | एक तरह से देखा जाए तो   नीतीश कुमार ने ग्राम कचहरी सचिव को कुछ नहीं दिया |
           आज भी  सभी संविदा कर्मी की कुछ न कुछ मान्यदेय वृद्धि हुई है लेकिन कचहरी सचिव की मान्यदेय में कुछ  भी वृद्धि नहीं की गई | आज भी इतनी महंगाई में इन्हे मात्र 6000 रूपए मिल रहा है | इस छोटी सी राशि से उन्हें अपनी जरुरत की 40% की पूर्ति नहीं होती होगी | आज भी वो अपना जीवन जैसे तैसे गुजार रहे है उनके बच्चे का पढाई लिखाई तो दूर की बात इस छोटी राशि से अपना जरुरत भी पूरा नहीं कर पता होगा |
          कोई भी सरकार  इतनी निर्दई कैसे हो सकती है मुझे ये समझ नहीं आता सरकार क्यों नहीं समझती की ये शोषण है |
        आज ग्राम कचहरी सचिव की माली हालत इतनी ख़राब है की कुछ कहना भी हमारे लिए शर्म की बात है | आज  इतनी महंगाई में ये लोग अपना जीवन जैसे तैसे गुजार  रहे है इनका जीवन भगवान भरोसे है | 
     अगर अभी भी सरकार नहीं जगी तो इनका जीवन बिल्कुल वर्बाद  हो जायेगा क्योंकि ये लोग पिछले 14 वर्षो से इसी में संलग्न है जिसके कारण  अब ये सब को कोई दूसरा काम करना भी उनके लिए असहनीय हो जायेगा |
      सरकार को चाहिए की इनकी मान्यदेय वृद्धि जल्द से जल्द कर दे ताकि ये लोग भी सम्मानजनक जिंदगी जी सके |  
       अब सभी चीजों पर गौर किया जाए पता चला की ग्राम कचहरी सचिव की संगठन ज्यादा मेहनत नहीं किया बल्कि सिर्फ वो भी राजनिति करते रहे | क्योंकि गौर किया जाए  तो पता चलता है इनका संघ एक दो वार छोड़ दे तो इनलोगो ने कभी भी सरकार  के विरुद्ध आवाज नहीं उठाया इसका प्रदेश टीम सिर्फ सरकार के मंत्री से मिलते रहे और मंत्री जी इन्हे आश्वासन देते रहे और ये मानते रहे और सरकार के कंधे से कंधे मिलाकर चलने की बात करते रहे |
   ग्राम कचहरी सचिव संघ के प्रदेश टीम ने जब 2018 में अपने सचिव साथियो को भरोसा दिया की एक महीने के अंदर ग्राम कचहरी सचिव स्थाई हो जायेंगे , मान्यदेय में भी वृद्धि भी हो जाएगी , इनलोगो को बहुत बड़ी सपना दिखाया और प्रोग्राम करने के लिए पैसा भी चंदा किया लेकिन न ही ग्राम कचहरी सचिव की नौकरी स्थाई हुई और न ही कोई मान्यदेय में वृद्धि हुई और न ही कोई प्रोग्राम हुआ बाद में भी ग्राम कचहरी सचिव संघ के  प्रदेश टीम ने सिर्फ आश्वासन देते रहे लेकिन हुआ कुछ नहीं |
       आज ग्राम कचहरी सचिव संघ एक तरह से देखा जाए तो बिलकुल बिखर चूका है  क्योंकि ग्राम कचहरी सचिव संघ के प्रदेश टीम ने अपने साथियो को जबरदस्त धोखा दिया | इसी धोखा के कारण आज बिहार के  कोई भी ग्राम कचहरी सचिव अपने प्रदेश टीम पर भरोसा नहीं कर रहे है , उस पर से भरोसा बिलकुल उठ चूका है | और होना भी चाहिए क्योंकि किसी भी संगठन का प्रदेश टीम को अपने साथियों को धोखा देना एक अपराध ही है |
     अगर प्रदेश टीम से कोई गलती भी हुई थी तो वो सबके सामने आकर उन्हें बोलना चाहिए अपनी बातो को सभी प्रखंड और जिला अध्यक्ष के सामने रखनी चाहिए थी ताकि संघ का विश्वास बना रहे लेकिन ऐसा भी नहीं किया गया | इससे साफ जाहिर है की ग्राम कचहरी सचिव की जो स्थिति है |  उसमे संघ का भी बहुत बड़ा  हाथ है |
         आज संगठन विखर चूका है लेकिन ऐसा नहीं की इसे फिर से उठाया नहीं जा सकता है | लेकिन इस संगठन को खड़ा करने के लिए कोई ठोस नेतृत्व नहीं मिल पाया अगर ठोस नेतृत्व के साथ थोड़ा सा मेहनत किया जाए  तो इस संगठन को फिर से जिन्दा किया जा सकता है | 
       आज ग्राम कचहरी सचिव को चाहिए की आज अपने संगठन को खड़ा और मजबूत करने के लिए प्रखंड स्तर से लेकर  जिला स्तर तक जल्द से जल्द बैठक करनी चाहिए और एक प्रदेश टीम का गठन करनी चाहिए ताकि सरकार के साथ कोई भी बात की जा सके | अन्यथा ज्यादा देरी होने पर ग्राम कचहरी सचिव को नुकसान ही  है | अगर संगठित होकर सरकार से कोई बात नहीं होगा तो कुछ मिलने वाला नहीं है उसे जो अभी मिल रहा है उसी में संतोष करना पड़ेगा इसलिए अच्छा होगा की जितनी जल्द हो अपने संगठन को मजबूत करनी चाहिए |    
      ये आर्टिकल लिखने का मतलब मेरा किसी को ठेस पहुँचाना नहीं बल्कि ग्राम कचहरी सचिव को सोये हुए आत्मा को जगाना है ताकि वो अपनी यूनिटी को समझे और एक होकर सरकार के साथ बात करे समय के अनुसार सरकार को दिखानी चाहिए की हम सब एक है | 



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