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मोटिवेशन की बात motivation ki baat , motivational fact

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 मोटिवेशन की बात motivation ki baat  सीढियाँ  उन्हें मुबारक जिन्हे छत तक जाना है ! आपकी मंजिल आसमान है , आपको रास्ता खुद बनाना है| आपनी मंजिल को भुला कर जिया तो क्या जीया,  है दम तुझमें  पा कर दिखा | लिख दो खून से अपनी कामयाबी की कहानी ,  और बोल दो अपनी किस्मत को , की  है दम तो मिटा के दिखा | Please subscribe my channel , and support me छत को बहुत गुरुर था छत होने का , एक मंजिल और  बनी और  छत  फर्श हो गया | तूफान ज्यादा  होती है तो कस्ति डूब जाती है , और घमंड ज्यादा होती है तो हस्ती  डूब जाती है | पतंग  को भी पता होता है कि उसका अंत  एक कचरे में  जाकर  होना है ,लेकिन उससे पहले उसको आसमान छुकर दिखाना  होता  है | पहाड़ों को चिरकर जब नदी निकलती है ना तो कभी नहीं पूछती  कि समुंदर कितना दूर है और नदी में गिरने से किसी की मौत नहीं  आती | मरता तो वही है जिसको जिसको तैरना नहीं  आती  | मेहनत बताता है कि परिणाम कैसा मिलेगा , ना तो परिणाम बताता ही देता है कि आपकी मेहनत कैसा था |   जो ...

युवाओं में हार्ट अटैक की समस्या बढ़ती जा रही है क्यों ?

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  युवाओं में हार्ट अटैक की  समस्या दिन पर दिन बढ़ती जा रही है क्यों ?  युवा दिल के मरीज ज्यादा होते  जा रहे हैं इसकी मुख्य वजह निम्न है      अगर आप जीवन भर हार्ट अटैक , बीपी , साँस  इत्यादि संबंधी  बीमारी से बचना चाहते है तो  दिल से जुड़ी कुछ जरूरी बातों को जानना आवश्यक है |          कहावत में  हमेशा आप जरूर सुनते आ रहे होंगे  की दिल  बहुत नाजुक होता  है  इसलिए दिल का ध्यान रखने के लिए उससे जुड़ी  बातों के बारे में जानना चाहिए     *  सीने में जलन या दबाव होना                  अगर किसी व्यक्ति को हर  समय सीने में दबाव बने रहने का अनुभव होता है या जलन होता है  तो यह हार्ट वेन्स में ब्लॉकेज का संकेत हो सकता है | लेकिन यह  कोई जरूरी  नहीं  कि यह सिर्फ हार्ट वेन्स का ही संकेत हो  लेकिन ऐसी समस्या लगातार  बनी हुई है | तो  लोगों को इसको  नजरअंदाज नहीं करनी चाहिए |   - जिन लोगो को वे...

ग्राम कचहरी सचिव के मान्यदेय इतनी कम क्यों ? क्या कचहरी सचिव के साथ सरकार दोहरी निति अपना रही है ?

 ग्राम कचहरी सचिव की  मान्यदेय अभी तक  इतनी कम क्यों है     ग्राम कचहरी सचिव की पूरी कहानी एक नजर में जाने  जैसा की आप सभी जानते है बिहार में नितीश कुमार की एक महत्वकांक्षी सोच की न्याय के साथ विकास जो महात्मा गाँधी जी के सपनो को साकार करने चले थे जिसके लिए प्रत्येक पंचायत में एक ग्राम कचहरी का गठन किया गया | जिसमे एक ग्राम कचहरी सचिव एवं एक न्यायमित्र की संविदा पर वहाल किया गया | उस समय ग्राम कचहरी सचिव की मान्यदेय 2000 रुपये एवं न्यायमित्र का मान्यदेय 2500 रूपए था लेकिन कई सालो तक वितने के बाद भी कचहरी सचिव एवं न्यायमित्र की मान्यदेय में कोई वृद्धि नहीं हुई | एक तरह से देखा जाए  तो लगातार नीतीश कुमार अपनी अहंकारी निति राखी अहंकार में इतने चूर की उन्हें ये तक पता नहीं जो मान्यदेय दे रहे है उससे ग्राम कचहरी सचिव एवं न्यायमित्र को अपनी जरूरत की 10%  भी पूरा नहीं होगा | कई बार ग्राम कचहरी सचिव संघ के संगठन सरकार से बात की लेकिन सिर्फ आश्वासन के आलावा कुछ नहीं मिला हमेसा सरकार के तरफ से दोहरी निति अपनाई गई | जब 2014 में लोक सभा चुनाव में JDU बुर...